उर्दू ग़ज़लें- मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है


मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है
तेरे इख्लास से मोहब्बत की है तेरे एहसास से मोहब्बत की है तू मेरे पास नहीं है फिर भी तेरी याद से मोहब्बत की है कभी तो तूने भी मुझे याद किया होगा मैंने उन्ही लम्हात से मोहब्बत की है जिन में हों तेरी मेरी बातें , मैंने उस इंसान से मोहब्बत की है और मेह्की हों सिर्फ तेरी मोहब्बत से मैंने उन जज़्बात से मोहब्बत की है तुझसे मिलना तो अब ख्वाब सा लगता है मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है
मुहब्बतों के पयाम लिखना

कभी किताबों में फूल रखना , कभी दरख्तों पे नाम लिखना हमें भी याद है आज तक वो , नज़र से हर्फ़--सलाम लिखना वो चाँद चेहरा , वो बहकी बातें , सुलगते दिन थे , सुलगती रातें वो छोटे छोटे से काग़ज़ों पर , मुहब्बतों के पयाम लिखना गुलाब चेहरों से दिल लगाना , वो चुपके चुपके नज़र मिलाना वो आरज़ूओं के ख्वाब बुनना, वो क़िस्सा - -नाम तमाम लिखना मेरे शहर की हसीं फिज़ाओ , कहीं जो उन का निशान पाओ तो पूछना के कहाँ बसे वो , कहाँ है उन का क़याम लिखना गयी रुतों में रुबाब अपना , बस एक यह ही तो मश्ग़ला था किसी के चेहरे को सुबह लिखना , किसी के चेहरे को शाम लिखना
उर्दू ग़ज़लें- मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है


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