गजल : गम ए जुदाई

तेरी बदगुमानियो ने मुझको तुझसे दूर कर दिया है
तेरे साथ थे जो रिश्ते मेरे ,,आज मैंने उनको खत्म कर दिया है
ना शिकवा करना ना कभी तू मुझसे
ना शिकायत करना ना कभी तू मुझसे
तेरी हरकतों ने ही मुझे ये सब करने पर मजबूर कर दिया है
तेरी बदगुमानियो ने मुझको तुझसे दूर कर दिया है ।।
मेरे किरदार को हर वक़्त तूने दागदार ही किया है
चलता था जो कभी मैं सीना तानकर जमाने में
मुझ पर लगे तोहमतों ने आज मुझे शर्मसार किया है
मेरी निगाहें जो उठा करती थी कभी शान से
आज मेरी उन निगाहों को तूने नाबीना बना दिया है
तेरी बदगुमानियो ने मुझको तुझसे दूर कर दिया है ।।
इल्जाम जो लगाए थे तूने मेरे किरदार पर
दाग जो लगाए थे मेरी पेशानी की आब पर
तूने एक ही पल में मुझे जिंदा ही कफ़न कर दिया है
खोद कर खुली मेरी कब्र को उसमे मुझको दफन कर दिया है
जलाकर मेरी रूह को क्यो खाक तूने कर दिया है
तेरी बदगुमानियो ने मुझको तुझसे दूर कर दिया है ।।
ना अफ़सोश करना कभी जुदाई का मुझसे
ये सब तेरा ही तो फैंसला था जो ख़ास से आम कर दिया है
मेरी आँखों के बहते हुए अश्को का तूने बेरहमी से कत्ल कर दिया है
ख़ंजर की नॉक पर रखकर मेरी रूह को
हर पल हर लम्हा तूने छलनी किया है
तेरी बदगुमानियो ने मुझको तुझसे दूर कर दिया है ।।
तेरी बदगुमानियो ने मुझको तुझसे दूर कर दिया है
तेरी बदगुमानियो ने मुझको तुझसे दूर कर दिया है

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