रूह
हम अपनी रूह तेरे जिस्म में छोड़ आये है
तुझे गले से लगाना तो एक बहाना था
तुझे गले से लगाना तो एक बहाना था
यही बहुत है की दिल उसे ढूंढ लाया है
किसी के साथ ही सही वो नज़र तो आया है
किसी के साथ ही सही वो नज़र तो आया है
मेरा शहर छोड़ दो
वो बात बात पर देते है परिंदों की मिसाल
साफ़ साफ़ नहीं कहते मेरा शहर छोड़ दो
साफ़ साफ़ नहीं कहते मेरा शहर छोड़ दो
इश्क़ में ज़िद है
अंजाम की परवाह है तो इश्क़ करना छोड़ दो
इश्क़ में ज़िद है और ज़िद में जान भी चली जाती है
इश्क़ में ज़िद है और ज़िद में जान भी चली जाती है
अदब-ऐ-वफ़ा
अदब-ऐ-वफ़ा भी सीखो मोहबत की दरगाह में
फकत यूं ही दिल लगाने से , दिलो में घर नहीं बनते
फकत यूं ही दिल लगाने से , दिलो में घर नहीं बनते
इतिफाक
अगर होता है इतिफाक तो यूँ नहीं होता
वो चले उस राह पर जो मुझपे आकर खत्म हुई
वो चले उस राह पर जो मुझपे आकर खत्म हुई
दिल का सौदा
